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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना
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श्लोक 2
श्लोक
6.50.2
सुग्रीवस्य वच: श्रुत्वा वालिपुत्रोऽङ्गदोऽब्रवीत्।
न त्वं पश्यसि रामं च लक्ष्मणं च महारथम्॥ २॥
अनुवाद
सुग्रीव के ये वचन सुनकर बालिपुत्र अंगद ने कहा, 'क्या तुम भगवान राम और महाबली लक्ष्मण की दुर्दशा नहीं देख रहे हो?॥ 2॥
Hearing these words from Sugreeva, Vali's son Angada said, 'Are you not seeing the plight of Lord Rama and the mighty warrior Lakshmana?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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