श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.50.13 
विभीषणस्तु रामस्य दृष्ट्वा गात्रं शरैश्चितम्।
लक्ष्मणस्य तु धर्मात्मा बभूव व्यथितस्तदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री राम और लक्ष्मण के शरीर बाणों से बिंधे हुए देखकर धर्मात्मा विभीषण को उस समय बड़ा दुःख हुआ।
 
Seeing the bodies of Sri Rama and Lakshmana pierced with arrows, the virtuous Vibhishana felt very sad at that time. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)