श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.50.10 
शीघ्रमेतान् सुसंत्रस्तान् बहुधा विप्रधावितान्।
पर्यवस्थापयाख्याहि विभीषणमुपस्थितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
"शीघ्र जाकर उनसे कहो कि इंद्रजीत नहीं, विभीषण आया है। ऐसा कहकर इन सब वानरों को, जो प्रायः डरकर भागते रहते हैं, भागने से रोक दो।"॥10॥
 
"Go quickly and tell them that it is not Indrajit but Vibhishan who has come. Saying this, stop all these monkeys, who are often running away in fear, from running away."॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)