श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.5.20 
कदा नु खलु मे साध्वी सीतामरसुतोपमा।
सोत्कण्ठा कण्ठमालम्ब्य मोक्ष्यत्यानन्दजं जलम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मेरी धर्मपरायण सीता, जो दिव्य कन्या के समान सुन्दर है, कब उत्सुकता से मेरा आलिंगन करेगी और कब अपनी आँखों से आनन्द के आँसू बहाएगी?
 
When will my virtuous Sita, who is as beautiful as a celestial maiden, embrace me eagerly and shed tears of joy from her eyes?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas