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ramayan 6.5.15: वह पतिव्रता, पतिव्रता, काली आँखों वाली सीता, जिसका पति मैं हूँ, आज अनाथ की भाँति राक्षसों के बीच में पड़ी हुई है, उसे कोई रक्षक नहीं मिलेगा।   |   ramayan सर्ग 6.5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.5.15 
सा नूनमसितापाङ्गी रक्षोमध्यगता सती।
मन्नाथा नाथहीनेव त्रातारं नाधिगच्छति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह पतिव्रता, पतिव्रता, काली आँखों वाली सीता, जिसका पति मैं हूँ, आज अनाथ की भाँति राक्षसों के बीच में पड़ी हुई है, उसे कोई रक्षक नहीं मिलेगा।
 
That virtuous and faithful Sita, with her black eyes, whose husband I am, today being in the midst of demons like an orphan, must certainly not find any protector.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)