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ramayan 6.49.3: इतने में ही वीर श्री रामजी सर्प के पाश से बँधे हुए भी अपने शरीर के बल और पराक्रम के कारण मूर्च्छा से जाग उठे॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.49.3 
एतस्मिन्नन्तरे राम: प्रत्यबुध्यत वीर्यवान्।
स्थिरत्वात् सत्त्वयोगाच्च शरै: संदानितोऽपि सन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इतने में ही वीर श्री रामजी सर्प के पाश से बँधे हुए भी अपने शरीर के बल और पराक्रम के कारण मूर्च्छा से जाग उठे॥3॥
 
Meanwhile, the valiant Sri Rama, despite being bound by the serpent's noose, awoke from his unconscious state due to the strength and power of his body. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)