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ramayan 6.49.1: दशरथ के पुत्र श्रीराम और लक्ष्मण ऐसे पड़े थे मानो किसी भयंकर सर्परूपी बाण से बंधे हुए हों। उनके शरीर से रक्त बह रहा था और वे फुफकारते हुए सर्पों के समान साँस ले रहे थे॥1॥   |   ramayan सर्ग 6.49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.49.1 
घोरेण शरबन्धेन बद्धौ दशरथात्मजौ।
नि:श्वसन्तौ यथा नागौ शयानौ रुधिरोक्षितौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
दशरथ के पुत्र श्रीराम और लक्ष्मण ऐसे पड़े थे मानो किसी भयंकर सर्परूपी बाण से बंधे हुए हों। उनके शरीर से रक्त बह रहा था और वे फुफकारते हुए सर्पों के समान साँस ले रहे थे॥1॥
 
Dasaratha's sons Shri Ram and Lakshmana lay as if bound by a terrible serpent-shaped arrow. They were bleeding and breathing like hissing serpents.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)