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ramayan 6.47.18: उन्होंने देखा कि मांसभक्षी राक्षस तो अंदर प्रसन्नतापूर्वक बैठे हैं, परंतु राम और लक्ष्मण के पास खड़े वानर अत्यंत दुःखी हैं ॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.47: वानरों द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण की रक्षा, सीता को पुष्पकविमान द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण का दर्शन कराना और सीता रुदन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 47: वानरों द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण की रक्षा, सीता को पुष्पकविमान द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण का दर्शन कराना और सीता रुदन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.47.18 
प्रहृष्टमनसश्चापि ददर्श पिशिताशनान्।
वानरांश्चातिदु:खार्तान् रामलक्ष्मणपार्श्वत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने देखा कि मांसभक्षी राक्षस तो अंदर प्रसन्नतापूर्वक बैठे हैं, परंतु राम और लक्ष्मण के पास खड़े वानर अत्यंत दुःखी हैं ॥18॥
 
He saw the carnivorous demons happily inside but the monkeys standing near Rama and Lakshmana were extremely sad. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)