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ramayan 6.47.14-15: सीता को पुष्पकविमान पर बिठाकर त्रिजटा सहित वे राक्षसियाँ उन्हें राम और लक्ष्मण का दर्शन कराने के लिए चल पड़ीं। इस प्रकार रावण ने उन्हें ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित लंकापुरी में घुमाया। 14-15॥   |   ramayan सर्ग 6.47: वानरों द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण की रक्षा, सीता को पुष्पकविमान द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण का दर्शन कराना और सीता रुदन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 47: वानरों द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण की रक्षा, सीता को पुष्पकविमान द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण का दर्शन कराना और सीता रुदन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.47.14-15 
तत: पुष्पकमारोप्य सीतां त्रिजटया सह॥ १४॥
जग्मुर्दर्शयितुं तस्यै राक्षस्यो रामलक्ष्मणौ।
रावणश्चारयामास पताकाध्वजमालिनीम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सीता को पुष्पकविमान पर बिठाकर त्रिजटा सहित वे राक्षसियाँ उन्हें राम और लक्ष्मण का दर्शन कराने के लिए चल पड़ीं। इस प्रकार रावण ने उन्हें ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित लंकापुरी में घुमाया। 14-15॥
 
After making Sita sit on the Pushpakavimana, those demons along with Trijata set out to give her the darshan of Ram and Lakshmana. In this way Ravana made them roam over Lankapuri decorated with flags and banners. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)