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श्लोक 12-13h
श्लोक
6.47.12-13h
तत: पुष्पकमादाय राक्षस्यो रावणाज्ञया॥ १२॥
अशोकवनिकास्थां तां मैथिलीं समुपानयन्।
अनुवाद
रावण की आज्ञा से राक्षसियाँ पुष्पक विमान को अशोक वाटिका में बैठी हुई मिथिलेश कुमारी के पास ले आईं।
By Ravan's order the demonesses brought the Pushpak Vimana to Mithilesh Kumari who was sitting in the Ashok Vatika. 12 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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