श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 47: वानरों द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण की रक्षा, सीता को पुष्पकविमान द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण का दर्शन कराना और सीता रुदन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  6.47.10-11h 
अद्य कालवशं प्राप्तं रणे रामं सलक्ष्मणम्।
अवेक्ष्य विनिवृत्ता सा चान्यां गतिमपश्यती॥ १०॥
अनपेक्षा विशालाक्षी मामुपस्थास्यते स्वयम्।
 
 
अनुवाद
आज युद्धभूमि में राम और लक्ष्मण को मृत्यु के ग्रास में पड़े देखकर वह उनसे अपना मन हटा लेगी और अपने लिए कोई दूसरा आश्रय न देखकर बड़ी-बड़ी आँखों वाली सीता निराश होकर स्वयं मेरे पास आएगी।॥10 1/2॥
 
Today, on seeing Rama and Lakshmana fallen prey to death on the battlefield, she will turn her mind away from them. And seeing no other refuge for herself, Sita with big eyes will despair of that and will come to me herself.'॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)