vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना
»
श्लोक 8
श्लोक
6.46.8
अन्तरिक्षं निरीक्षन्तो दिश: सर्वाश्च वानरा:।
न चैनं मायया छन्नं ददृशू रावणिं रणे॥ ८॥
अनुवाद
युद्धस्थल में मायावी रावणकुमार इन्द्रजित् को सभी वानर बार-बार सब दिशाओं और आकाश की ओर देखकर भी नहीं देख सके॥8॥
All the monkeys could not see the illusive Ravana Kumar Indrajit in the battlefield even after looking repeatedly in all directions and at the sky. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×