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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना
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श्लोक 47
श्लोक
6.46.47
उत्पपात ततो हृष्ट: पुत्रं च परिषस्वजे।
रावणो रक्षसां मध्ये श्रुत्वा शत्रू निपातितौ॥ ४७॥
अनुवाद
राक्षसों में अपने दो शत्रुओं के मारे जाने का समाचार सुनकर रावण हर्ष से उछल पड़ा और अपने पुत्र को हृदय से लगा लिया ॥47॥
On hearing the news of the slaying of his two enemies among the demons, Ravana jumped for joy and embraced his son. ॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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