श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.46.45 
इन्द्रजित् तु महामाय: सर्वसैन्यसमावृत:।
विवेश नगरीं लङ्कां पितरं चाभ्युपागमत्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच महाजादूगर इन्द्रजीत अपनी पूरी सेना के साथ लंकापुरी लौटकर अपने पिता के पास आया।
 
Meanwhile the great magician Indrajit returned to Lankapuri with his entire army and came to his father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)