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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना
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श्लोक 44
श्लोक
6.46.44
समाश्वास्य तु सुग्रीवं राक्षसेन्द्रो विभीषण:।
विद्रुतं वानरानीकं तत् समाश्वासयत् पुन:॥ ४४॥
अनुवाद
इस प्रकार सुग्रीव को आश्वासन देकर राक्षसराज विभीषण ने भागने को तत्पर वानर सेना को पुनः सान्त्वना दी॥44॥
Thus giving assurance to Sugriva, the demon king Vibhishana again consoled the monkey army which was ready to run away. 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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