vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना
»
श्लोक 41
श्लोक
6.46.41
तस्मादाश्वासयात्मानं बलं चाश्वासय स्वकम्।
यावत् सैन्यानि सर्वाणि पुन: संस्थापयाम्यहम्॥ ४१॥
अनुवाद
'अतः तुम अपना ध्यान रखो और अपनी सेना को आश्वस्त करो। तब तक मैं इस भयभीत सेना को धैर्य प्रदान करके शांति प्रदान करूँगा ॥41॥
‘So you take care of yourself and reassure your army. Till then I will bring this frightened army back to peace by instilling patience. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×