Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.46.40: श्री रामजी के लिए यह कष्ट कुछ भी नहीं है। वे मर नहीं सकते; क्योंकि जिनके प्राण निकल गए हैं, उनके लिए दुर्लभ लक्ष्मी (सुन्दरता) उनका परित्याग नहीं कर रही हैं॥40॥ | ramayan सर्ग 6.46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नैतत् किंचन रामस्य न च रामो मुमूर्षति।
नह्येनं हास्यते लक्ष्मीर्दुर्लभा या गतायुषाम्॥ ४०॥
अनुवाद
श्री रामजी के लिए यह कष्ट कुछ भी नहीं है। वे मर नहीं सकते; क्योंकि जिनके प्राण निकल गए हैं, उनके लिए दुर्लभ लक्ष्मी (सुन्दरता) उनका परित्याग नहीं कर रही हैं॥40॥
‘This trouble is nothing for Shri Ram. He cannot die; because the goddess Lakshmi (beauty) which is rare for those whose life has ended, is not abandoning him.॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥