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ramayan 6.46.4: उस समय दोनों भाई रक्त से लथपथ बाणों की शय्या पर लेटे हुए थे। उनके सारे शरीर बाणों से ढँके हुए थे। वे निश्चल थे और धीरे-धीरे साँस ले रहे थे। उनकी गति रुक ​​गई थी॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.46.4 
अचेष्टौ मन्दनि:श्वासौ शोणितेन परिप्लुतौ।
शरजालाचितौ स्तब्धौ शयानौ शरतल्पगौ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय दोनों भाई रक्त से लथपथ बाणों की शय्या पर लेटे हुए थे। उनके सारे शरीर बाणों से ढँके हुए थे। वे निश्चल थे और धीरे-धीरे साँस ले रहे थे। उनकी गति रुक ​​गई थी॥4॥
 
At that time both the brothers were lying on the bed of arrows, soaked in blood. Their whole bodies were covered with arrows. They were motionless and breathing slowly. Their movements had stopped.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)