श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.46.28 
हर्षेण तु समाविष्ट इन्द्रजित् समितिञ्जय:।
प्रविवेश पुरीं लङ्कां हर्षयन् सर्वनैर्ऋतान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इससे युद्ध में विजयी इन्द्रजीत बहुत प्रसन्न हुआ और वह समस्त राक्षसों का आनन्द बढ़ाता हुआ लंकापुरी में चला गया ॥28॥
 
Due to this, Indrajit, victorious in the war, became very happy and he went to Lankapuri, increasing the joy of all the demons. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)