श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.46.11 
इन्द्रजित् त्वात्मन: कर्म तौ शयानौ समीक्ष्य च।
उवाच परमप्रीतो हर्षयन् सर्वराक्षसान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
श्री राम और लक्ष्मण को युद्धभूमि में सोते हुए देखकर इन्द्रजीत बहुत प्रसन्न हुआ। समस्त राक्षसों का हर्ष बढ़ाते हुए उसने अपने पराक्रम का वर्णन करना आरम्भ किया-॥11॥
 
Indrajit was very happy to see Shri Ram and Lakshman sleeping on the battlefield. Increasing the joy of all the demons, he started describing his bravery -॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)