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ramayan 6.46.10: यश, कीर्ति और पराक्रम से परिपूर्ण विभीषण ने वीर इन्द्रजित को देखा, जो माया के वरदान के प्रभाव से छिपा हुआ था ॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.46.10 
ददर्शान्तर्हितं वीरं वरदानाद् विभीषण:।
तेजसा यशसा चैव विक्रमेण च संयुत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यश, कीर्ति और पराक्रम से परिपूर्ण विभीषण ने वीर इन्द्रजित को देखा, जो माया के वरदान के प्रभाव से छिपा हुआ था ॥10॥
 
Vibhishana, full of glory, fame and bravery, saw the brave Indrajit, who was hidden due to the influence of Maya's boon. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)