श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.46.1 
ततो द्यां पृथिवीं चैव वीक्षमाणा वनौकस:।
ददृशु: संततौ बाणैर्भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब उपर्युक्त दस वानर पृथ्वी और आकाश का अन्वेषण करके लौटे, तब उन्होंने श्री राम और लक्ष्मण दोनों भाइयों को बाणों से बिंधे हुए देखा॥1॥
 
Thereafter when the above-mentioned ten monkeys returned after exploring the earth and sky, they saw both the brothers Sri Ram and Lakshmana pierced with arrows.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)