श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.45.8 
निरन्तरशरीरौ तु तावुभौ रामलक्ष्मणौ।
क्रुद्धेनेन्द्रजिता वीरौ पन्नगै: शरतां गतै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
क्रोधित होकर इन्द्रजित ने उन दोनों वीरों श्री राम और लक्ष्मण को बाणों रूपी सर्पों से इस प्रकार बींध डाला कि उनके शरीर में तनिक भी ऐसा स्थान नहीं बचा जहाँ बाण न चुभे हों॥8॥
 
Enraged, Indrajit pierced those two heroes Shri Ram and Lakshman with snakes in the form of arrows in such a way that there was not even a little place left in their bodies where arrows were not stuck. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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