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ramayan 6.45.4: तब उन सभी वानरों ने उस विशाल वृक्ष को उठा लिया और बड़े हर्ष के साथ आकाश में घूमते हुए दसों दिशाओं में उसे खोजने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.45.4 
ते सम्प्रहृष्टा हरयो भीमानुद्यम्य पादपान्।
आकाशं विविशु: सर्वे मार्गमाणा दिशो दश॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब उन सभी वानरों ने उस विशाल वृक्ष को उठा लिया और बड़े हर्ष के साथ आकाश में घूमते हुए दसों दिशाओं में उसे खोजने लगे।
 
Then all those monkeys picked up the huge tree and went through the sky with great joy, searching for it in all ten directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)