श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.45.28 
बद्धौ तु तौ वीरशये शयानौ
ते वानरा: सम्परिवार्य तस्थु:।
समागता वायुसुतप्रमुख्या
विषादमार्ता: परमं च जग्मु:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
समस्त वानरों ने सर्पपाश में बँधे हुए वीरों की शय्या पर सो रहे उन दोनों भाइयों को घेर लिया। हनुमान आदि प्रमुख वानर जो वहाँ आये थे, व्यथित होकर महान शोक में डूब गये।
 
All the monkeys surrounded the two brothers who were sleeping on the bed of heroes, bound in the serpent's noose. The main monkeys like Hanuman who had come there were distressed and fell into great sorrow.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे पञ्चचत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें पैंतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ ५॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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