श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.45.23 
रुक्मपुङ्खै: प्रसन्नाग्रै रजोगतिभिराशुगै:।
नाराचैरर्धनाराचैर्भल्लैरञ्जलिकैरपि।
विव्याध वत्सदन्तैश्च सिंहदंष्ट्रै: क्षुरैस्तथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रजित ने उसे शीघ्रगामी नाराच 1, अर्ध नाराच 2, भल्ल 3, अंजलिक 4, वत्सदंत 5, सिंहदंष्ट्र 6 और क्षुर 7 प्रकार के बाणों से घायल कर दिया था, जो सुवर्णमय पंख, स्वच्छ मुख और धूल के समान वेग वाले थे (अर्थात जो धूल के समान छिद्ररहित स्थान में भी प्रवेश कर सकते थे)॥23॥
 
Indrajit had wounded him with the arrows of the fast moving Narach 1, Ardha Narach 2, Bhalla 3, Anjalik 4, Vatsadanta 5, Simhadanstra 6 and Kshur 7 species, having golden wings, clean face and speed like dust (i.e., which can enter even a place without holes like dust). 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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