Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.45.21: जिस प्रकार झरने निरन्तर जल गिराते रहते हैं, उसी प्रकार वे दोनों भाई उस क्रूर राक्षस के बाणों से घायल होकर अत्यन्त रक्त बहा रहे थे, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था। | ramayan सर्ग 6.45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस प्रकार झरने निरन्तर जल गिराते रहते हैं, उसी प्रकार वे दोनों भाई उस क्रूर राक्षस के बाणों से घायल होकर अत्यन्त रक्त बहा रहे थे, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था।
Just as waterfalls keep pouring down their water, similarly those two brothers were bleeding profusely after being wounded by the arrows of that cruel demon who could assume any form at will.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥