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ramayan 6.45.16: युद्धभूमि के मुहाने पर बाणों से बँधे हुए वे दोनों भाई पलक झपकते ही ऐसी अवस्था में पहुँच गए कि उनमें ऊपर देखने की भी शक्ति नहीं रही (वास्तव में यह केवल अपनी मानवता दिखाने का नाटक था। वे तो काल के ग्रास हैं। उन्हें कौन बाँध सकता है?)।   |   ramayan सर्ग 6.45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.45.16 
बद्धौ तु शरबन्धेन तावुभौ रणमूर्धनि।
निमेषान्तरमात्रेण न शेकतुरवेक्षितुम् ॥ १ ६॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि के मुहाने पर बाणों से बँधे हुए वे दोनों भाई पलक झपकते ही ऐसी अवस्था में पहुँच गए कि उनमें ऊपर देखने की भी शक्ति नहीं रही (वास्तव में यह केवल अपनी मानवता दिखाने का नाटक था। वे तो काल के ग्रास हैं। उन्हें कौन बाँध सकता है?)।
 
Bound by arrows at the mouth of the battle field, those two brothers reached such a state in the blink of an eye that they did not even have the strength to look up (actually, it was only a play to show their humanity. They are the death of time. Who could bind them?).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)