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ramayan 6.45.12: मैंने तुम दोनों रघुवंशियों को कंकपात्रयुक्त बाणों के जाल में फँसा लिया है। अब क्रोध में भरकर मैं तुम दोनों को यमलोक भेज रहा हूँ।॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.45.12 
प्रापिताविषुजालेन राघवौ कङ्कपत्रिणा।
एष रोषपरीतात्मा नयामि यमसादनम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुम दोनों रघुवंशियों को कंकपात्रयुक्त बाणों के जाल में फँसा लिया है। अब क्रोध में भरकर मैं तुम दोनों को यमलोक भेज रहा हूँ।॥12॥
 
I have trapped both of you Raghuvanshis in the net of arrows having Kankapatra. Now filled with anger I am sending both of you to Yamaloka.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)