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ramayan 6.44.7: तब वानरों का क्रोध भयंकर हो गया। वे उछल-कूद करने लगे और अपने तीखे दांतों से राक्षस सेना के स्वर्ण-आभूषणों से सुसज्जित घोड़ों और विषैले सर्पों के समान दिखने वाली उनकी ध्वजाओं को फाड़ डाला।   |   ramayan सर्ग 6.44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.44.7 
ते हयान् काञ्चनापीडान् ध्वजांश्चाशीविषोपमान्।
आप्लुत्य दशनैस्तीक्ष्णैर्भीमकोपा व्यदारयन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब वानरों का क्रोध भयंकर हो गया। वे उछल-कूद करने लगे और अपने तीखे दांतों से राक्षस सेना के स्वर्ण-आभूषणों से सुसज्जित घोड़ों और विषैले सर्पों के समान दिखने वाली उनकी ध्वजाओं को फाड़ डाला।
 
Then the anger of the monkeys became terrible. They jumped up and down and with their sharp teeth they tore apart the horses of the demon army decorated with golden ornaments and their flags which looked like poisonous snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)