श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.44.4 
हत दारय चैहीति कथं विद्रवसीति च।
एवं सुतुमुल: शब्दस्तस्मिन् सैन्ये तु शुश्रुवे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सारी सेना से ये भयानक चीखें सुनाई दे रही थीं - "मारो, मारो, आओ, क्यों भाग रहे हो?" 4.
 
From all over the army, these terrifying cries were being heard - "Hit, kill, come, why are you running away?" 4.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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