श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.44.39 
प्रकाशरूपस्तु यदा न शक्त-
स्तौ बाधितुं राक्षसराजपुत्र:।
मायां प्रयोक्तुं समुपाजगाम
बबन्ध तौ राजसुतौ दुरात्मा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब राक्षसराज इन्द्रजित् खुलेआम युद्ध करते हुए भी उन दोनों राजकुमारों को हानि न पहुँचा सका, तब उसने उन पर माया का प्रयोग किया और दुष्टात्मा ने उन दोनों भाइयों को बाँध लिया ॥39॥
 
When the demon prince Indrajit was unable to harm the two princes while fighting openly, he then resorted to using Maya (illusion) on them and the evil spirit bound both the brothers. ॥39॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुश्चत्वारिंश: सर्ग:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें चौवालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४४॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd