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ramayan 6.44.30: वालिकुमार अंगद की वीरता की प्रशंसा योग्य ऋषियों, देवताओं तथा दोनों भाइयों श्री राम और लक्ष्मण ने बड़ी प्रशंसा की॥30॥   |   ramayan सर्ग 6.44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.44.30 
तत् कर्म वालिपुत्रस्य सर्वे देवा: सहर्षिभि:।
तुष्टुवु: पूजनार्हस्य तौ चोभौ रामलक्ष्मणौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वालिकुमार अंगद की वीरता की प्रशंसा योग्य ऋषियों, देवताओं तथा दोनों भाइयों श्री राम और लक्ष्मण ने बड़ी प्रशंसा की॥30॥
 
The bravery of Valikumar Angad, worthy of praise, was greatly praised by the sages, the gods and the two brothers Shri Ram and Lakshman. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)