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ramayan 6.44.26: गुफाओं से भरा हुआ त्रिकूट पर्वत, चारों ओर फैलती उस महान ध्वनि से गूंजता हुआ, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह किसी के प्रश्न का उत्तर दे रहा हो।   |   ramayan सर्ग 6.44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.44.26 
तेन शब्देन महता प्रवृद्धेन समन्तत:।
त्रिकूट: कंदराकीर्ण: प्रव्याहरदिवाचल:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
गुफाओं से भरा हुआ त्रिकूट पर्वत, चारों ओर फैलती उस महान ध्वनि से गूंजता हुआ, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह किसी के प्रश्न का उत्तर दे रहा हो।
 
The Trikuta mountain, filled with caves, resonating with that great sound spreading all around, seemed as if it was answering someone's question. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)