Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.44.24: चारों ओर सुनहरे पंखवाले बाण गिर रहे थे। उनकी चमक के कारण वह रजनी ऐसी शोभा पा रही थी, जैसे शरद ऋतु की वह रात्रि जो जुगनुओं से विचित्र दिखाई देती है॥24॥ | ramayan सर्ग 6.44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चारों ओर सुनहरे पंखवाले बाण गिर रहे थे। उनकी चमक के कारण वह रजनी ऐसी शोभा पा रही थी, जैसे शरद ऋतु की वह रात्रि जो जुगनुओं से विचित्र दिखाई देती है॥24॥
Arrows with golden feathers were falling all around. Due to their glow, that Rajni looked as wonderful as the autumn night which looks strange with fireflies. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥