vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना
»
श्लोक 23
श्लोक
6.44.23
ये त्वन्ये राक्षसा वीरा रामस्याभिमुखे स्थिता:।
तेऽपि नष्टा: समासाद्य पतङ्गा इव पावकम्॥ २३॥
अनुवाद
राम के सामने खड़े अन्य वीर राक्षस भी उसी प्रकार नष्ट हो गए जैसे पतंगे आग में जल जाते हैं॥23॥
The other brave demons standing before Rama also got destroyed like moths get burnt in fire.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×