श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.44.21 
ते तु रामेण बाणौघै: सर्वमर्मसु ताडिता:।
युद्धादपसृतास्तत्र सावशेषायुषोऽभवन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के बाणों की वर्षा से उनके प्राणों में चोट लगने के कारण वे छहों राक्षस युद्ध छोड़कर भाग गए; अतः उनके प्राण बच गए॥ 21॥
 
Due to the shower of arrows from Shri Ram hitting them in all their vital spots, those six demons abandoned the battle and fled; hence their lives were saved. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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