| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना » श्लोक 20 |
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| | | | श्लोक 6.44.20  | यज्ञशत्रुश्च दुर्धर्षो महापार्श्वमहोदरौ।
वज्रदंष्ट्रो महाकायस्तौ चोभौ शुकसारणौ॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | उनके नाम इस प्रकार हैं- दुर्धर्ष वीर यज्ञशत्रु, महापार्श्व, महोदर, महाकाय, वज्रदंष्ट्र और ये दोनों शुक और सारण। 20॥ | | | | Their names are as follows - Durdharsha Veer Yajnashatru, Mahaparshva, Mahodar, Mahakaya, Vajradanshtra and both of them Shuka and Saran. 20॥ | | ✨ ai-generated | | |
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