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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.44.2 
अन्योन्यं बद्धवैराणां घोराणं जयमिच्छताम्।
सम्प्रवृत्तं निशायुद्धं तदा वानररक्षसाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वानरों और राक्षसों में वैर था। दोनों पक्षों के योद्धा बड़े भयंकर थे और जीतने के इच्छुक थे; इसलिए उनमें रात्रिकालीन युद्ध होने लगा॥ 2॥
 
There was enmity between the monkeys and the demons. The warriors of both the sides were very fierce and wanted to win; therefore, a night battle began between them.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)