vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना
»
श्लोक 16
श्लोक
6.44.16
सा बभूव निशा घोरा हरिराक्षसहारिणी।
कालरात्रीव भूतानां सर्वेषां दुरतिक्रमा॥ १६॥
अनुवाद
वानरों और राक्षसों का नाश करने वाली वह भयंकर रात्रि मृत्यु की रात्रि के समान समस्त प्राणियों के लिए अथाह हो गई थी ॥16॥
That dreadful night which destroyed the monkeys and the demons had become unfathomable to all creatures like the night of death. ॥16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd