श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.44.16 
सा बभूव निशा घोरा हरिराक्षसहारिणी।
कालरात्रीव भूतानां सर्वेषां दुरतिक्रमा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वानरों और राक्षसों का नाश करने वाली वह भयंकर रात्रि मृत्यु की रात्रि के समान समस्त प्राणियों के लिए अथाह हो गई थी ॥16॥
 
That dreadful night which destroyed the monkeys and the demons had become unfathomable to all creatures like the night of death. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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