श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.44.12 
ततो भेरीमृदङ्गानां पणवानां च नि:स्वन:।
शङ्खनेमिस्वनोन्मिश्र: सम्बभूवाद्भुतोपम:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भेरी, मृदंग और पणव आदि वाद्यों की ध्वनि आने लगी, जो शंखों की ध्वनि और रथ के पहियों की घड़घड़ाहट के साथ अत्यंत अद्भुत प्रतीत हो रही थी॥ 12॥
 
Thereafter the sounds of musical instruments like bheri, mridanga and panava started coming which along with the sound of conches and the rattling of chariot wheels appeared very wonderful.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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