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ramayan 6.44.10-11h: घोड़ों के खुरों से कुचली हुई और रथ के पहियों से उड़ती हुई धरती की धूल, योद्धाओं की आँखों और कानों को बंद कर देती थी। 10 1/2   |   ramayan सर्ग 6.44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.44.10-11h 
तुरंगखुरविध्वस्तं रथनेमिसमुत्थितम्॥ १०॥
रुरोध कर्णनेत्राणि युध्यतां धरणीरज:।
 
 
अनुवाद
घोड़ों के खुरों से कुचली हुई और रथ के पहियों से उड़ती हुई धरती की धूल, योद्धाओं की आँखों और कानों को बंद कर देती थी। 10 1/2
 
The dust from the earth, crushed by the horses' hooves and raised by the chariot wheels, would block the eyes and ears of the warriors. 10 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)