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ramayan 6.43.39: श्रेष्ठ वानर सुषेण को आक्रमण करते देख रात्रिचर विद्युन्माली ने तुरन्त ही अपनी गदा से उसकी छाती पर प्रहार किया।   |   ramayan सर्ग 6.43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.43.39 
तमापतन्तं गदया विद्युन्माली निशाचर:।
वक्षस्यभिजघानाशु सुषेणं हरिपुङ्गवम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ वानर सुषेण को आक्रमण करते देख रात्रिचर विद्युन्माली ने तुरन्त ही अपनी गदा से उसकी छाती पर प्रहार किया।
 
Seeing the best of apes Sushena attacking, the night-charterer Vidyunmali immediately struck him on the chest with his mace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)