श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.43.33 
द्विविदं वानरेन्द्रं तु द्रुमयोधिनमाहवे।
शरैरशनिसंकाशै: स विव्याधाशनिप्रभ:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब अशनिप्रभा ने युद्धभूमि में एक वृक्ष के सहारे युद्ध कर रहे वानरराज द्विविद को वज्र के समान तेजस्वी बाणों से घायल कर दिया।
 
Then Ashaniprabha wounded the monkey king Dwivid, who was fighting on the battlefield with the help of a tree, with arrows as bright as thunderbolts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)