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ramayan 6.43.32: द्विविद का स्पर्श वज्र और अशनिका के समान असह्य था। समस्त दैत्यों के देखते-देखते उन्होंने एक पर्वत शिखर से अशनीप्रभा नामक रात्रि-राक्षस पर प्रहार किया।   |   ramayan सर्ग 6.43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.43.32 
वज्राशनिसमस्पर्शो द्विविदोऽप्यशनिप्रभम्।
जघान गिरिशृङ्गेण मिषतां सर्वरक्षसाम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
द्विविद का स्पर्श वज्र और अशनिका के समान असह्य था। समस्त दैत्यों के देखते-देखते उन्होंने एक पर्वत शिखर से अशनीप्रभा नामक रात्रि-राक्षस पर प्रहार किया।
 
Dwivid's touch was as unbearable as a thunderbolt and an ashanika. In front of all the demons he struck the night-demon named Ashaniprabha from a mountain peak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)