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ramayan 6.43.26: अग्निकेतु, दुर्जय रश्मिकेतु, सुप्तघ्न और यज्ञकोप नामक राक्षसों ने अपने बाणों से श्री रामचन्द्रजी को घायल कर दिया। 26॥   |   ramayan सर्ग 6.43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.43.26 
अग्निकेतुश्च दुर्धर्षो रश्मिकेतुश्च राक्षस:।
सुप्तघ्नो यज्ञकोपश्च रामं निर्बिभिदु: शरै:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अग्निकेतु, दुर्जय रश्मिकेतु, सुप्तघ्न और यज्ञकोप नामक राक्षसों ने अपने बाणों से श्री रामचन्द्रजी को घायल कर दिया। 26॥
 
Demons named Agniketu, Durjaya Rashmiketu, Suptaghna and Yagyakop injured Shri Ramchandraji with their arrows. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)