श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.43.21 
जम्बुमाली रथस्थस्तु रथशक्त्या महाबल:।
बिभेद समरे क्रुद्धो हनूमन्तं स्तनान्तरे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाबली जंबुमाली रथ पर बैठे थे। क्रोधित होकर उन्होंने युद्धभूमि में रथ के भाले से हनुमान की छाती पर प्रहार किया।
 
The mighty Jambumali was seated on a chariot. Infuriated, he struck Hanuman's chest with a chariot's spear in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)