श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.42.7 
दृष्ट्वा दाशरथिर्लङ्कां चित्रध्वजपताकिनीम्।
जगाम सहसा सीतां दूयमानेन चेतसा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
विचित्र ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित लंकापुरी को देखकर दशरथनन्दन श्री राम व्यथित मन से मन में सीता का स्मरण करने लगे-॥7॥
 
Seeing Lankapuri decorated with strange flags and banners, Dashrathanandan Shri Ram started remembering Sita in his mind with a distressed mind -॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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