श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.42.47 
स सम्प्रहारस्तुमुलो मांसशोणितकर्दम:।
रक्षसां वानराणां च सम्बभूवाद्भुतोपम:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार राक्षसों और वानरों में भयानक एवं अद्भुत युद्ध हुआ, जिससे वहाँ रक्त और मांस का मैल बन गया।
 
In this way a terrible and wonderful battle took place between the demons and the monkeys, due to which a filth of blood and flesh was formed there.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे द्विचत्वारिंश: सर्ग:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें बयालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४२॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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