श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.42.44 
राजा जयति सुग्रीव इति शब्दो महानभूत्।
राजञ्जयजयेत्युक्त्वा स्वस्वनामकथां तत:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वानर सेना में 'वानरराज सुग्रीव की जय' का महान उद्घोष गूंजने लगा। उधर राक्षस भी 'राजा रावण की जय' कहते हुए अपना-अपना नाम जपने लगे।
 
The great cry of 'Victory to the monkey king Sugreeva' began to reverberate in the monkey army. On the other hand, the demons also started chanting their own names, saying 'Victory to King Ravana'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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